कैसे ले पाती हो तुम इस ज़हरीली फि़ज़ां में सांस,
कैसे ले पाती हो तुम इस ज़हरीली फि़ज़ां में सांस, क्यों तुम्हें चुभतीं नहीं, वो गंदी ,लालची निगाहें जो आंखों
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