“पत्नी पतिव्रता या पतिता”
मैं ‘पत्नी’ हूं क्योंकि मैं अपने ‘पति’ को पतन से बचाती हूं। उन्हें गिरने नहीं देना मेरा धर्म है। मैं
Read Moreमैं ‘पत्नी’ हूं क्योंकि मैं अपने ‘पति’ को पतन से बचाती हूं। उन्हें गिरने नहीं देना मेरा धर्म है। मैं
Read Moreनारी तू परा शक्ति है, ब्रह्मांड करता तेरी भक्ति है तू सहनशक्ति का प्रतिरूप है, तू देवी है, तू दात्री
Read Moreबरेली | बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति (अंतरराष्ट्रीय) द्वारा दो दिवसीय संस्था के वार्षिक कार्यक्रम उत्तराखंड काव्य महोत्सव (काव्य का महाकुंभ)
Read More4 फरवरी 2021 को विश्व कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में मदरहुड क्लब द्वारा एक ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया
Read Moreअखंड बलशाली मां है तू तो, अंश मात्र मुझे बल दे। सहस्त्र दल रक्त कमल पर तू बैठी, मुझे मात्र
Read Moreहै माँ दुर्गे हूँ अवतार मैं तेरा फिर क्यों क्षण क्षण हुआ तिरस्कार मेरा तुझे छिपने को मिली जगह अर्द्ध
Read Moreमैं तेज हूं, मैं वेग हूं ! हर शक्ति का संवेग हूं!! आवेग हूं इस सृष्टि का! विनाश हूं तम्
Read Moreशुक्रिया ऐ जिंदगी तूने मुझे जीना सिखाया शुक्रिया ए खुदा तूने मुझे मरना सिखाया शुक्रिया उन नफरत करने वालों का
Read Moreछूना है आसमान मुझे तारों को ज़मीं पर लाना है पूछना है पता बादलों से चांद को भी झुकाना है
Read MoreI once asked a very successful woman to share her secret with me. She smiled and said to me.. “I
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