February 11, 2026

अंतर्राष्ट्रीय लोक गायक दीपक त्रिपाठी ने महान भोजपुरी कलाकार भिखारी ठाकुर को उनके जन्मदिन पर अनोखे ढंग से याद किया

मुंबई| भोजपुरी के महान कलाकार श्री भिखारी ठाकुर जी का आज जन्मदिन है। भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर का जन्म १८ दिसम्बर १८८७ को बिहार के सारन जिले के कुतुबपुर (दियारा) गाँव में हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय लोक गायक दीपक त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर भिखारी ठाकुर को उनके जन्मदिन पर अनोखे ढंग से याद किया है। दीपक त्रिपाठी लिखते हैं “भोजपुरी के शेक्सपियर महान कलाकार आदरणीय भिखारी ठाकुर जी के जन्म दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएँ। भिखारी ठाकुर के ई रचना “पियवा गईलें कलकतवा ये सजनी” ह छोट गो प्रयास बा आप सभे सुनी राउर दीपक त्रिपाठी।”
दीपक त्रिपाठी ने बड़ी खूबसूरती से भिखारी ठाकुर के इस क्लासिक गीत को गा कर उन्हें ट्रिब्यूट पेश किया है। आपको बता दें कि भिखारी ठाकुर के विख्यात नाटक बिदेसिया का यह गीत ‘हे सजनी रे, हे सजनी पिया गईले कलकतवा हे सजनी’ एक क्लासिक सांग का दर्जा रखता है। बॉलीवुड निर्देशक सुधीर मिश्रा ने अपनी फिल्म ‘हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी’ में भी यह गीत शामिल किया था।
उल्लेखनीय है कि भोजपुरी के महान कलाकार भिखारी ठाकुर बहु आयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने एक से बढ़कर एक भोजपुरी गीतों एवं नाटकों की रचना की। वह एक ऐसे ग्रेट लोक कलाकार थे जिन्हें ‘भोजपुरी के शेक्सपीयर’ का खिताब मिला हुआ है। भिखारी ठाकुर कवि, गीतकार, नाटककार होने के साथ साथ ड्रामा के डायरेक्टर, लोक संगीतकार और अभिनेता भी थे। चूंकि भिखारी ठाकुर की मातृभाषा भोजपुरी थी इसलिए उन्होंने भोजपुरी में ही अपनी कविताओं, गीतों और नाटकों को लिखा।
आपको बता दें कि दीपक त्रिपाठी का छठ के अवसर पर एक गीत टी सीरिज द्वारा रिलीज़ किया गया था जिसे खूब पसंद किया गया. ‘छठी मैया गोद भरे’ नामक यह गीत दीपक त्रिपाठी, अनन्या सिंह की आवाज़ में है. उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के लोकगायक दीपक त्रिपाठी अवधी, भोजपुरी और हिन्दी के प्रसिद्ध सिंगर हैं. दीपक त्रिपाठी के कई एल्बम और गीत सुपरहिट हो चुके हैं। देश में ही नहीं विदेशों में भी उनके गानों के कद्रदान बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उनके लाइव शोज़ पूरी दुनिया में होते रहते हैं. दुबई, श्रीलंका, ब्रिटेन सहित अब तक वो लगभग 50 से ज्यादा देशों का सफर भी कर चुके हैं। दीपक त्रिपाठी ने भोजपुरी लोक गीतों की परम्परा को आगे बढ़ाया है. इनको कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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